ओडिशा के प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. दीपक कुमार षड़ंगी नहीं रहे, 85 साल की उम्र में छोड़ी दुनिया, बहरागोड़ा में भी शोक

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जमशेदपुर : ओडिशा के प्रख्यात शिक्षाविद् व झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा की माटी के लाल प्रोफेसर दीपक कुमार षाड़ंगी नहीं रहे. उनका 85 साल की उम्र में बारीपदा के एक अस्पताल में निधन हो गया। अंतिम समय में उनके उनकी धर्मपत्नी प्रोफ़ेसर कल्पना षडंगी, पूर्व अध्यक्ष सीमा कॉलेज, जेष्ठ पुत्र प्रोफेसर राजेश सारंगी, कनिष्ठ पुत्र मितेश षडंगी व दोनों पुत्र बधु उपस्थित थे।.

उनका जन्म झारखंड के पूर्वी जिला के बहारागोरा प्रखंड के गंडानाटा गांव में 5 सितंबर 1937 को हुआ था. उनके पिता प्रख्यात स्वाधीनता सेनानी व ओडिय़ा भाषा के शिक्षा प्रचारक तारापादो षड़ंगी एवं माता सरोजनी षड़ंगी सुगृहणी थीं।

खंडामोदा ओडिय़ा हाई स्कूल से माध्यमिक पास करने के बाद उनकी पढ़ाई जीएम कॉलेज सम्बलपुर एम पी सी कॉलेज बारीपदा और रेवेंसा कॉलेज कटक से हुई थी।

छात्र जीवन में वे उत्कल यूनियन ऑफ स्टूडेंट से जुड़े और एक फायर ब्रांड छात्र नेता के रूप में अपने आपको प्रतिष्ठित किया। वे एक बार एम पी सी कॉलेज छात्र संसद के सभापति , दो वार कटक रेवेंशा कॉलेज में छात्र संसद के सभापति निर्वाचित हुए थे। ओडिय़ा,अंग्रेजी, हिंदी, बांग्ला एवं संस्कृत साहित्य पर उनकी गजब की पकड़ थी। इतिहास के तो वे प्रोफेसर थे ही।

1958 में एक अध्यापक के रूप में पहले बारीपदा एमपीसी कॉलेज में सेवा दी. बाद में कटक के रावेंशा कॉलेज में प्रोफेसर बने। इसके बाद बलंगी राजेंद्र कॉलेज बालेश्वर में सेवा दी. अंत में एमपीसी कॉलेज तथा एमपीसी ऑटोनॉमस कॉलेज के 6 साल तक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया ओए बाद में ओडिशा उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में सेवा सेवानिवृत्त हुए।

उनका सामाजिक दायरा बहुत बड़ा था। वे मयूरभंज उत्कल सम्मेलन के सभापति, मयूरभंज साहित्य परिषद के सभापति, बारीपदा साहित्य संसद के सभापति जैसे कई पदों पर रहे और अपने गतिशील नेतृत्व के जरिए इन संस्थाओं की गतिविधियों को ऊंचाई तक पहुंचाया.

वे इतिहास कांग्रेस के उपसभापति, वल्र्ड यूनिवर्सिटी सर्विस के भूतपूर्वक संपादक ,उत्कल विश्वविद्यालय, उत्तर ओडि़शा विश्वविद्यालय के सीनेट और सिंडिकेट के सदस्य भी थे। उन्होंने 1956 के सीमा आंदोलोन में बढ़चढ़कर भाग लिया था।

हजारों लोगों ने किए अंतिम दर्शन
प्रोफेसर दीपक कुमार षड़ंगी के निधन की सूचना मिलते ही बारीपदा से बहरोगाड़ा तक के इलाके में शोक फैल गया। हजारों लोगों ने पहुंचकर उनके अंतिम दर्शन किए और भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
उनके पार्थिव शरीर को फॉरेस्ट कॉलोनी स्थित बांस भवन में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया गया था, जहां समाज के विभिन्न वर्ग के लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।


बारीपदा श्मशान घाट पर उनका दाह संस्कार हुआ। जेष्ठ पुत्र राजेश ने मुखाग्नि दी। मौके पर डॉक्टर करुणाकर महापात्र ,झारखंड के पूर्व मंत्री डॉक्टर दिनेश कुमार षड़ंगी , पूर्व विधायक कुणाल षड़ंगी, संतोष दास , कुना दास , कल्याण सिन्हा वेगरा आदि उपस्थित थे।


उनके निधन पर केंद्रीय मंत्री इंजीनियर बिश्वेषर टुडू , डॉक्टर किशोर बासा , झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा सचिव डॉक्टर अरुण कुमार रथ, पद्मश्री दमोयंती बेसरा ,जमशेदपुर बार एसोसिशन के पूर्व अध्यक्ष मनोरंजन दास , समेत अनेक विशिष्ट व्यक्तियों ने गहरा शोक प्रकट करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है.


भाई व भतीजा झारखंड की सियासत में सक्रिय
प्रोफेसर दीपक कुमार षड़ंगी का परिवार झारखंड की सियासत में महत्वपूर्ण दखल रखता है. उनके छोटे भाई डॉ. दिनेश षाड़ंगी झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं. भतीजा कुणाल षाडग़ी विधायक रह चुके हैं और अभी प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता हैं।

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